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मेहँदी घाट

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मेंहदी घाट कन्नौज की गंगा नदी के किनारे स्थित एक महत्वपूर्ण स्थल है, जिसे अब महादेवी घाट के नाम से जाना जाता है। यह घाट मूल रूप से मेंहदीपुर गांव के पास गंगा के किनारे बने पुल के कारण विकसित हुआ। 1987 में हिंदी साहित्य की सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा के देहांत के बाद उनकी अस्थियाँ इस घाट पर विसर्जित की गईं, और तभी से इसे महादेवी घाट के नाम से जाना जाने लगा। यह घाट केवल धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि कन्नौज की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। प्रतिवर्ष गंगा दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा और आषाढ़ पूर्णिमा पर यहाँ हजारों श्रद्धालु स्नान और पूजा के लिए आते हैं। घाट पर स्थित भगवान शंकर जी का भव्य मंदिर दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें शंकर जी और नंदी का मंदिर अलग-अलग संरचना में स्थित है। मेंहदी घाट/महादेवी घाट का शांत और पावन वातावरण आगंतुकों को आध्यात्मिक शांति और सांस्कृतिक अनुभूति प्रदान करता है।

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