1. मनरेगा
मनरेगा योजनान्तर्गत जनपद कन्नौज में कराये गये कार्याे का संक्षिप्त विवरण
मनरेगा योजनान्तर्गत जनपद कन्नौज में भारत सरकार एंव राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 हेतु कुल स्वीकृत श्रम बजट में 14.88 लाख मानव दिवस सृजन करने एंव रु0 3800.00 लाख व्यय करने का प्रावधान किया गया था , जिसके सापेक्ष कुल 26961 परिवारों को वर्षान्त तक रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित था। जनपद कन्नौज में योजनान्तर्गत अव तक कुल 32016 परिवारों को रोजगार उपलव्ध कराते हुये 7.32 लाख मानव दिवसों का सृजन किया गया है तथा रू0 2126.12 लाख की धनराशि व्यय की गई है। कुल व्यय धनराशि से 130 तालावों का निर्माण कराते हुये रु0 218.24 लाख की धनराशि तथा लक्षित 100 आंगनबाडी केन्द्रों के सापेक्ष 87 केन्द्रों पर निर्माण कार्य पूर्ण कराया जा चुका है। उक्त आंगनबाडी केन्द्रों का निर्माण मनरेगा , आई0सी0डी0एस0 तथा पंचायती राज विभाग से किया गया है। मनरेगा अंश रू0 5.00 लाख , आई0सी0डी0एस0 अंश रू0 2.00 लाख तथा पंचायती राज अंश रू0 1.06 लाख कुल रु0 8.06 लाख से 01 आंगनबाडी केन्द्र का निर्माण कार्य कराया गया है। इस प्रकार कुल रु0 449.00 लाख की धनराशि व्यय कर स्थायी परिसम्पत्तियों का निर्माण कराया गया है ,जिसमें से लगभग 30 केन्द्रों को आई0सी0डी0एस0 विभागों को हस्तानान्तरित कराया गया है। इसी प्रकार योजनान्तर्गत तालाव के किनारों तथा सम्पर्क मार्गोे के चारो ओर 57000 वृक्षों का वृक्षारोपण कराकर , तालावों का सुन्दरीकरण कराकर , बेन्च आदि का भी निर्माण कराया गया है। इसी प्रकार कुल लम्वाई लगभग 105.00 किमी0 में 380 चक मार्गाे का निर्माण कराकर लगभग प्रधानमंत्री ग्रामीण योजनान्तर्गत कुल लाभान्वित 5308 परिवारों को भी मनरेगा योजना से 90 दिनों की मजदूरी का भुगतान करने के साथ ही शौचालय निर्माण कराये जाने का भी कराया जा रहा है।
योजना कि फोटो
योजना का नाम - प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण
1. सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना 2011 के अनुसार राजस्व ग्रामवार प्राप्त सूची का ग्राम पंचायत में सार्वजनिक स्थल पर चस्पा कराकर प्रकाशन किया गया। 2. प्रकाशन के पश्चात प्राप्त सूची का सम्बन्धित ग्राम पंचायत सचिव द्वारा स्थलीय सत्यापन किया गया। 3. सत्यापित सूची का अनुमोदन ग्राम सभा की खुली बैठक में कराया गया। 4. स्थलीय सत्यापन के उपरान्त आवास साफ्ट की साइट पर सूची रिमूवल कर अपात्रों का सूची से हटाया गया। 5. आवास साफ्ट अपात्रों को हटाने के पश्चात साइट पर स्वतः प्राथमिकता सूची तैयार हुई। 6. प्राथमिकता सूची के आधार पर वर्गवार आवंटित लक्ष्य के अनुसार वरीयता क्रम में लाभार्थियों का रजिस्टेशन कराया गया। 7. रजिस्ट्रेशन के उपरान्त जिओ टेगिंग हेतु लाभार्थीवार आवास साफ्ट पर आन-लाइन ओल्ड हाउस एवं निर्माण स्थल का फोटो लिया गया। 8. जिओ टेगिंग के आधार पर जनपद स्तर से आवासों की स्वीकृति आन-लाइन की गयी। 9. स्वीकृत लाभार्थियों की आर्डर सीट जनरेट कर आनलाइन धनराशि सीधे लाभार्थियों के खातों में स्थानान्तरित की गयी। 10. आवास निर्माण हेतु रू0 1,20,000/- की धनराशि तीन किश्तों में सीधे लाभार्थी के खातों में हस्तान्तरित की जायेगी। 11. उक्त धनराशि के अतिरिक्त मनरेगा योजना से 90 दिन का श्रम की धनराशि रू0 15,750/- व शौचालय निर्माण हेतु रू0 12,000/- की अतिरिक्त धनराशि की सहायता प्रदान की जायेगी। 12. आवास निर्माण 25 वर्ग मीटर में, जिसमें 01 कमरा, रसोईघर व बरामदा निर्मित कराया जायेगा। 13. आवास पर योजना का नाम, निर्माण वर्ष व स्वीकृत लागत अंकन करना होगा। 14. आवास का निर्माण समय से न करने पर समस्त धनराशि का दुरूपयोग मानते हुये भू-राजस्व की भांति वसूली किये जाने का प्राविधान है। 15. जनपद को वित्तीय वर्ष 2016-17 में 5308 व वर्ष 2017-18 में 3087 कुल 8395 आवासों का लक्ष्य प्राप्त हुआ, जिसके सापेक्ष शतप्रतिशत आवासों की स्वीकृति प्रदान कर दी गयी है।
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Reports
         2- एन०आर०एल०एम० योजना
योजना का नाम - एन०आर०एल०एम० योजना
उ0प्र0 राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जनपद कन्नौज। माह जून 2011 में स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के स्थान पर भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का संचालन आरम्भ किया गया। शुरूआती दौर में यह योजना केवल कुछ राज्यों के चुनिन्दा विकास खण्डों में संचालित की जा रही थी जो दिनांक 01.04.2013 से सम्पूर्ण देश के समस्त खण्डों में संचालित की जाने लगी है। स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना के संचालन में जो कमियां रही थीं जैसे कि ग्रामीण परिवारों का असामान्य गठन, सदस्यों का अनुपयुक्त क्षमतावर्धन, बैंको द्वारा पर्याप्त ऋण-वितरण का अभाव एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन करने हेतु सक्षम-प्रोफेशनल्स का अभाव इत्यादि को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्तर्गत दुरूस्त करने का प्रयत्न किया गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन भारत सरकार द्वारा संचालित बडे पैमाने पर गहन रूप से समुदाय द्वारा संचालित गरीबी-उन्मूलन कार्यक्रम है। उत्तर प्रदेश की दृष्टि से वर्तमान में यह योजना प्रदेश के 35 जिलों के 200 विकास खण्डों में सघन रूप से संचालित है। जनपद कन्नौज में अगस्त 2015 में विकास खण्ड कन्नौज इंटेन्सिव विकास खण्ड के रूप में चुना गया। दिसम्बर 2016 में जनपद के एक और विकास खण्ड उमर्दा को योजनान्तर्गत इंटेन्सिव रूप में चुना गया तत्पश्चात् वर्ष 2017-18 में तीन विकास खण्ड (हसेरन, गुगरापुर एवं जलालाबाद) इंटेन्सिव कार्य के लिये चुने गये इस प्रकार जनपद अन्तर्गत वर्तमान में 5 विकास खण्ड इंटेन्सिव और 3 विकास खण्ड नाॅन इंटेन्सिव रूप से चयनित हंै। जनपद में विकास खण्ड कन्नौज एन0आर0ओ0 सपोर्टिड है जहाँ राष्ट्रीय संसाधन संस्था-सर्प आन्ध्र प्रदेष की प्रशिक्षित कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन एवं ग्राम संगठन का कार्य किया जा रहा है। विकास खण्ड को चार क्लस्टर में बांटा गया है। क्लस्टर स्तर पर टी0एस0यू0-सृजन के 04 प्रोफेशनल्स तथा एन0आर0ओ0 सर्प आन्ध्रप्रदेश के 04 प्रोफेशनल्स कार्यरत हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18 में जनपद का एक और विकास खण्ड हसेरन एन0आर0ओ0 सपोर्टिड विकास खण्ड के रूप में चयनित हुआ है और यहां भी एन0आर0ओ0 सर्प आन्ध्र प्रदेश के 04 प्रोफेशनल्स कार्यरत हैं। सभी इंटेन्सिव विकास खण्डों में मिशन के स्वतंत्र कार्यालय स्थापित हंै। सभी कार्यालयों में डाटा इन्ट्री कक्ष बनाये गये हैं जहाँ सेवा प्रदाता द्वारा उपलब्ध कराये गये डाटा इन्ट्री आपरेटर अपना कार्य करते हंै। कार्यक्रम समन्वय के लिये जनपद स्तर पर जिला मिशन प्रबन्धक की तैनाती की गयी है। डी0आर0डी0ए0 के एक लेखाकार की सेवाएं भी योजनान्तर्गत ली जा रही हंै। वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जनपद के उपायुक्त स्वतः रोजगार द्वारा जनपद की सम्पूर्ण गतिविधियों की देख-रेख, पर्यवेक्षण एवं अनुश्रवण किया जा रहा है। मिशन अंतर्गत जनपद में समूहों द्वारा साप्ताहिक बैठक, साप्ताहिक बचत, नियमित आपसी लेन-देन, समय से कर्ज वापिसी एवं नियमित समूह सम्बन्धी अभिलेखों का रख-रखाव (पंच सूत्र) का पालन किया जा रहा है। योग्य समूहों को गठन के तीन माह के पश्चात् रिवाॅल्विग फण्ड की राशि प्रति समूह 15000.00 एवं गठन के छः माह के उपरान्त समूहों की सूक्ष्म ऋण योजना बनवाकर ग्राम संगठन के माध्यम से सामुदायिक निवेश निधि के रूप में प्रति समूह रू0 110000.00 प्रदान किये जा रहे हैं। समूहों की स्थानीय बैंकों में ऋण सम्बद्धता करवायी जा रही है एवं उनको इंटरेस्ट सबवेन्शन के तहत लाभ भी पहुँचाया जा रहा है। योजनान्तर्गत बुक कीपर, समूह सखी, सी0आर0पी0, बी0आर0पी0, डी0आर0पी आदि सामुदायिक कैडर का चयन एवं क्षमतावर्धन करते हुए योजना के क्रियान्वयन में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। योजना आरम्भ से लेकर अब तक जनपद में 1691 समूहों, 51 ग्राम संगठनों एवं 04 शंकुल संगठनो का गठन किया जा चुका है। 858 समूहों को रिवाल्विंग फण्ड एवं 366 समूहों को सामुदायिक निवेश निधि (सी0आई0एफ0) प्रदान की गयी है। 173 समूहों को विभिन्न बैंक शाखाओं से वित पोषण करवाया गया है। 24 ग्राम संगठनों को आजीविका निधि (एल0एफ0) एवं 28 ग्राम संगठनों को जोखिम निवारण निधि (बी0आर0एफ0) उपलब्ध करायी जा चुकी है। सामाजिक पूँजी के रूप में 120 कम्यूनिटी रिसोर्स पर्सन, 74 समूह सखी व 20 ब्लाक रिसोर्स को चिन्हित, चयनित और प्रशिक्षित कर योजना के काम में लगाया गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2017-18 में माह 20 नवम्बर तक 491 समूहों का गठन व 37 ग्राम संगठनों का गठन किया गया है। 245 समूहों को रिवाल्विंग फण्ड एवं 187 समूहों को सामुदायिक निवेश निधि की धनराशि उपलब्ध करवायी गयी है। जनपद योजनान्तर्गत समूहों, ग्राम संगठनों व शंकुल संगठनों के बुक कीपर, पदाधिकारी, समूह सखी और उपसमितियों के सदस्यों को निर्धारित मोड्यूल्स पर प्रशिक्षित किया गया है। 557 स्वयं सहायता समूहों को माॅड्यूलर ट्रेनिंग व 540 स्वयं सहायता समूहों के बुक कीपर को प्रशिक्षण, ग्राम संगठन पदाधिकारियों का प्रशिक्षण, ग्राम संगठनो की उपसमितियों का प्रशिक्षण, 51 समूह सखियों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। 120 प्रशिक्षित आई0सी0आर0पी0 में से 110 आई0सी0आर0पी0 जनपद जालौन, फतेहपुर एवं उन्नाव में समूह गठन एवं प्रशिक्षण का कार्य कर रही है। आजीविका संवर्द्धन की दृष्टि से समूह की महिलाओं द्वारा अगरबत्ती, अचार, मेंहदी पाउडर, चिप्स पापड़, किराना दुकान, वर्तन दुकान, ड्रेसमेकिंग, ब्यूटी पार्लर, ई-रिक्शा, आटा चक्की, बकरी पालन आदि कार्य किये जा रहा है।
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Source : District Development Office